SURTA ]- छत्तीसगढ़ी भाषा अउ छत्तीसगढ़ के धरोहर ल समर्पित

रमेशकुमार सिंह चौहान के छत्तीसगढ़ी काव्यांजली:- सुरता rkdevendra.blogspot.com

जय हो दारू

  ऐती ओती चारो कोती एकेच जयकारा हे । जय हो दारू, जय हो दारू, जय हो दारू।। कोनो कहय ये नवा जमाना के चलन हे, त कोनो कोनो कहय ये काम हे श...
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कोशिश करईया मन के कभु हार नई होवय

कोशिश करईया मन के कभु हार नई होवय

                       कोशिश करईया मन के कभु हार नई होवय (श्री हरिवंशराय बच्चन की अमर कृति ‘‘कोशिश करने वालो की हार नही होती‘‘ का अनुवाद) ...
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मोर मईया के जगराता हे

आगे आगे नवरात्रि तिहार, सब मिल के करव जयजय कार । मंदिर मंदिर दाई करत हे बिहार, मोर मईया के जगराता हे । कोनो जलाव जोत मनौती, त कोनो करावय ...
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 -ः मोर छत्तीसगढ के सुघ्घर गांव:ः-

-ः मोर छत्तीसगढ के सुघ्घर गांव:ः-

जिहां चिरई-चिरगुन करे चांव-चांव, जिहां कऊंवा मन करें कांव-कांव । जिहां कोलिहा-कुकुर मन करे हांव-हांव, ऊंहें बस्ते मोर छत्तीसगढ के सुघ्घर...
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हे जगत जननी महामाई

हे जगत जननी महामाई, सदा रहव सहाई । मैं तोर नान्हे नादान लईका, अऊ तही मोर दाई । तोरेच किरपा म ये जिंनगी पाय हव । तोहीच ल अपन मन मंदिर...
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ताते-तात

शिव-शिव शिव अस (डमरू घनाक्षरी)

डमरू घनाक्षरी (32 वर्ण लघु) सुनत-गुनत चुप, सहत-रहत गुप दुख मन न छुवत, दुखित रहय तन । बम-बम हर-हर, शिव चरण गहत, शिव-शिव शिव अस, जग दुख भर मन ...

अउ का-का हे इहाँ-