गुरुवार, 23 मई 2013

नान्हेपन म

नान्हेपन म ममादाई अब्बड किस्सा सुनावय,
रात रात जाग के ओ ह हमला मनावय ।

कभु सुनावय किस्सा भोले बबा के नादानी,
कभु सुनावय राजा रानी के सुघ्घर कहानी ।

कभु सुनावय कइसे ढेला पथरा निभाईन मितानी,
कभु सुनावय भूत प्रेत अऊ राक्षस मन के शैतानी ।

ओखर हर किस्सा हमर आंखी म नवा चमक लावय,
दाई ऊंघावत ऊंघावत हमला नवा किस्सा सुनावय ।

ओ जमाना म कहा टी.वी. अऊ सिनेमा के परदा,
तब तो रहिस किस्सा अऊ नाचा पइखन के जादा दरजा ।

न चमक न दमक तभो अच्छा लगय हमर मन,
आज चारो कोती के चमक दमक घलो उदास हे मोरो मन ।
.................‘‘रमेश‘‘.......................