मंगलवार, 21 मई 2013

-ः मोर छत्तीसगढ के सुघ्घर गांव:ः-

जिहां चिरई-चिरगुन करे चांव-चांव,
जिहां कऊंवा मन करें कांव-कांव ।
जिहां कोलिहा-कुकुर मन करे हांव-हांव,
ऊंहें बस्ते मोर छत्तीसगढ के सुघ्घर गांव ।

गाय बछरू कुकरा कुकरी अऊ छेरी पठरू,
घर घर नरियावय मिमीयावय कुकरू कू कुकरू ।
दूध दूहे बर बइठे पहटिया दोहनी धरे उघरू,
गाय चाटय पूछी उठाय दूघ पियत हे बछरू ।
बारी बखरी म बंधय कोनो रूखवा के छांव,
ऊंहें बस्ते मोर छत्तीसगढ के सुघ्घर गांव ।


बाबूमन खेलय बाटी ईब्बा, नोनी मन खेलय फुग्गडी,
कोनो खेलय तास चैसर त कोनो करय चारी-चुगली ।
पनिहारिन म करय हंसी ठिठोली मुडी म बोहें गगरी ,
जिहां के घर संग भावय परछी अंगना म लहरावय तुलसी ।
जिहां तुलसी के कतका मान , जेखर कतका सुघ्घर छांव,
ऊंहें बस्ते मोर छत्तीसगढ के सुघ्घर गांव ।

गोरसी धरे बईठे बबा नातीमन ल धरे बुढ़ही दाई,
नागर जोते ल गे हे ददा कांदी लुये बर दाई ।
चैपाल म बईठे पंच पटइल अऊ गौटिया,
संग म बईठे पंडित बाबू जेखर हे चुटिया ।
गौतरिहा मन बैईठे सुघ्धर आमा के छांव,
ऊंहें बस्ते मोर छत्तीसगढ के सुघ्घर गांव ।

मया म गावय करमा ददरिया, लइका होंय  म गावय सोहर,
बिहाव म गावय भडौनी गीत, संग छोडवनी मांगय मोहर ।
जिहां उत्तीय म बिराजे सढहादेव, त बुडतीय म महामाई,
जिहां ठाकुर देव बिराजे सौहवे, जऊन करय सदा सहाई ।
देवी देवता मन हा गा बिराजे संगी जिहां हर ठांव,
ऊंहें बस्ते मोर छत्तीसगढ के सुघ्घर गांव ।