मंगलवार, 21 मई 2013

मोर मईया के जगराता हे

आगे आगे नवरात्रि तिहार, सब मिल के करव जयजय कार ।
मंदिर मंदिर दाई करत हे बिहार, मोर मईया के जगराता हे ।

कोनो जलाव जोत मनौती, त कोनो करावय पूजा पाठ ।
कोनो गावय जसगीत मनोहर, त कोनो लेवय साट ।
भक्तन मन करत हे गोहार, मोर मईया के जगराता हे ।

कोनो हवय निर्जला उपास, त कोनो लेवय फरहार ।
कोनो साधय जतंर मंतर, त कोनो करय करिया करंजस ।
भक्तन मन के हवय नाना प्रकार, मोर मईया के जगराता हे ।

कोनो जावय माॅ के पहाडि़या, त कोनो बोवय घर म फुलवरिया ।
कोनो चढ़ाव धजा नरियर, त कोनो लावय फूल लाली पिरियर ।
कोनो चढ़ाव मईया ल सिंगार, मोर मईया के जगराता हे ।

कोनो मांगय धन दोगनी, त कोनो मांगय काम म बरकत महारानी ।
कोनो मांगय आद औलाद, भक्तन मन के हे नाना फरियाद ।
कोनो चाहय केवल भक्ति तुहार, मोर मईया के जगराता हे ।
....................‘‘रमेश‘‘..........................