सोमवार, 20 मई 2013

आवत हे चुनाव...........

आवत हे चुनाव

आवत हे चुनाव नेतामन अब आही हमर गांव ।
कऊवा कुकुरमन कस अब करही कांव-कांव ।।

गांव-गांव अऊ गली-गली, उखर बेनर पोस्टर पटही,
लिपे पोते हमर दीवार ह, उखर झूठा नारा ले पुतही ।
जस जादूगर बसुरी बजा के, मुंदथे हमर आंखी कान,
आश्‍वासन के झुनझुना धराके, कइसे बनाथे गा ठांव ।। आवत हे चुनाव.........

नवा नवा सपना सजा के कहय, करीहव तुहार काम,
तुहीमन हमर दाई ददा अऊ तुहीमन  चारो धाम ।
तुहरे किरपा ले करत हव, तुहरे सेवा के काम,
गुतुर गुतुर गोठ गोठियाही अऊ परही गा पांव ।। आवत हे चुनाव.........

घर-घर जाही अऊ जइसे देवता तइसे मनाही,
कइसनो करके ओमन हमन ल तो गा रिझाही ।
दाई माईमन बर बिछीया खिनवा, सुघ्घर लुगरा
ददा भाईमन बर बाटय गा दारू पाव-पाव ।। आवत हे चुनाव.........

साम-दाम, दण्ड भेद के जम्मो नियम ल अजमाही,
जात-पात, धरम-करम क्षेत्रवाद के आगी लगाही ।
विकास के गोठ गोठिया के, आंखी म सपना सजाहीं,
अऊ जुवारी कस लगाही अपन गा जम्मो दांव ।। आवत हे चुनाव.........

जइसे बोहू तइसे पाहू तुहीमन तो अडबड कहिथव,
फेर अइसन लबरा मनला, लालच मा काबर चुनथव ।
हमर गांव के चतुर सियान, लगावव थोकिन ध्यान ।
अइसने मा हमन ल कहां मिलही शांति के छांव ।। आवत हे चुनाव.........