गुरुवार, 23 मई 2013

कोशिश करईया मन के कभु हार नई होवय

                       कोशिश करईया मन के कभु हार नई होवय
(श्री हरिवंशराय बच्चन की अमर कृति ‘‘कोशिश करने वालो की हार नही होती‘‘ का अनुवाद)

लहरा ले डरराये  म डोंगा पार नई होवय,
कोशिश करईया मन के कभु हार नई होवय ।
नान्हे नान्हे चिटीमन जब दाना लेके चलते,
एक बार ल कोन कहिस घेरी घेरी गिरते तभो सम्हलते ।
मन चंगा त कठौती म गंगा, मन के जिते जित हे मन के हारे हार,
मन कहू हरियर हे तौ का गिरना अऊ का चढना कोन करथे परवाह ।

कइसनो होय ओखर मेहनत बेकार नई होवय,
कोशिश करईया मन के कभु हार नई होवय ।

डुबकी समुददर म  गोताखोर ह लगाथे,
फेर फेर डुबथे फेर फेर खोजथ खालीच हाथ आथे ।
अतका सहज कहां हे मोती खोजना  गहरा पानी म,
बढथे तभो ले उत्साह ह दुगुना दुगुना ऐही हरानी म ।

मुठठी हरबार ओखर खाली नई होवय,
कोशिश करईया मन के कभु हार नई होवय ।

नकामी घला एक चुनौती हे ऐला तै मान,
का कमी रहिगे, का गलती होगे तेनला तै जान ।
जब तक न होबो सफल आराम हराम हे,
संघर्ष ले झन भागव ऐही चारो धाम हे ।
कुछु करे बिना कभू जय जयकार नई होवय,
कोशिश करईया मन के कभु हार नई होवय ।

.................‘‘रमेश‘‘.....................