बुधवार, 22 मई 2013

विदेशी सिक्षा



 सिक्षा सिक्षा ये विदेशी सिक्षा से का होय ।
 न कौढी के न काम के घुम घुम के बदनाम होय ।।

 न ओला पुरखा के मान हे न देश धरम के ज्ञान ।
 विदेसी सिक्षा लेवत हे अऊ विदेसी संस्कृति के अभिमान ।।

 दाई-ददा मोर लईका पढथ हे कहिके नई कराव कुछु काम ।
 नान्हेपन ले जांगर नई चलाय हे अब कोन जांगर ले होही काम ।।

 पूजा-पाठ, कथा-भागवत सब ल देवत हे अंधविश्वास के नाम ।
 लईका पढिस लिखिस  अऊ होगें कइसन ओ हर विदवान ।।

पागे कहु नौकरी चाकरी त होगे परदेशिया नई आवय कुछु काम
 न पाइंच कहु काम धाम त परबुधिया होके होवथ हे बदनाम ।।

गांव-गांव अऊ गली-गली नेता अऊ ऊखर चम्मच के भरमार हे
 जेन कहावय भाई-दादा जेखर करम ले ये देश शरमसार हे ।।

 सिरतुन कहव चाहे कोनो गारी देवव के गल्ला ।
 इंकरे आये ले होवत हे भ्रष्टाचार के अतका हल्ला ।।
................‘‘रमेश‘‘........................