बुधवार, 22 मई 2013

//कोनो काही कहय //

कोनो प्रतिभा गुलाम नई होवय अमीरी के,
रददा रोक नइ सकय कांटा गरीबी के ।
कोनो काही कहय चिखले म कमलदल ह खिलथे,
अऊ हर तकलीफ ले जुझेच म सफलता ह मिलथे ।

हर खुशी कहां मिलथे अमीरी ले,
कोनो खुशी कहां अटकथे गरीबी ले ।
कोनो काही कहय खुशी तो मनेच ले मिलथे,
तभे तो मन चंगा त कठौति म गंगा कहिथे ।

सुरूज निकलथे दुनो बर,
पुरवाही बहिथे दुनो बर ।
कोनो काही कहय बरसा घाम दुनो बर बरिसथे,
जेखर जतका बर गागर ओतके पानी भरथे ।

अमीर सदा अमीर नई रहय
गरीब सदा गरीबी नई सहय ।
कोनो काही कहय भाग करम के गुलाम रहिथे ।
सियान मन धन दोगानी ला हाथ के मइल कहिथे ।

सफल होय बर हिम्मत के दरकार हे,
जेन सहय आंच तेन खाय पांच कहाय हे ।
कोनो काही कहय जांगर टोर जेन कमाथे,
अपन मुठ्ठी म करम किस्मत ल पाथे ।

-रमेशकुमार सिंह चौहान