शनिवार, 15 जून 2013

मिलईया हे मोला पगार

गुतुर गुतुर भाखा बोलय,
अंतस म मधुरस घोलय,
मोर सुवारी करे सिंगार,
मिलईया हे मोला पगार ।

कईसे लगहूं जी कहू होही,
कान म खिनवा, कनिहा म करधनिया,
अऊ गर म होही सोनहा हार,
मिलईया हे मोला पगार ।

फलनिया ह बनवाय हे,
मोरो मन ललचाय हे,
पूरा कर दौ ना जी मोरो साध,
होही तुहार बड़ उपकार,
मिलईया हे मोला पगार ।

ददा गो कापी पेन सिरागे हे,
स्कूल के फिस ह आगे हे,
लइकामन करत हे पुकार,
मिलईया हे मोला पगार ।

मोर स्कूल बस्ता ह चिरागे हे,
पेंट कुरता ह जुन्नागे हे,
लइकामन करत हे मनुहार,
मिलईया हे मोला पगार ।

रंधनही कुरीया ह चिल्लावत हे,
घेरी घेरी चेतावत हे,
सिरागे हे चाऊर दार,
मिलईया हे मोला पगार ।

पाछू महिना बड़ सधायेंव,
अपन बर मोटर साइकिल ले आयेंव,
दुवारी म खड़े हे लगवार,
मिलईया हे मोला पगार ।

का करव कइसे करव कहिके गुनत हव,
अपने माथा ल अपने हाथ म धुनत हव,
काबर एतके तनखा देते सरकार,
मिलईया हे मोला पगार ।
.......‘‘रमेश‘‘...........