मंगलवार, 6 अगस्त 2013

धरे कलम गुनत हंव का लिखंव

धरे कलम गुनत हंव का लिखंव
लइकामन बर संस्कार के गीत लिखंव,
कचरा बिनईया लइकामन के चित्र खिचंव ।
कोनो कोनो लइका विडि़यो गेम खेलय,
कोनो कोनो लइका ठेला पेलय ।
कोनो कोनो कतका महंगा स्कूल म पढ़य,
कोनो कोनो बचपन म जवानी ल गढ़य ।
कोखरो कोखरो के संस्कार ल,
ददा दाई मन दे हे बिगाड़।
कोखरो कोखरो ददा दाई मन,
भीड़ा दे हे जिये के जुगाड़ ।
बड़ आंगाभारू लइकामन के संसार
ऐमा मै नई सकंव,
धरे कलम गुनत हंव अब का लिखंव ।

धरे कलम गुनत हंव का लिखंव
लिखथे सब मया मिरीत के बोल,
रखदंव महू अपन हिरदय ल खोल ।
करेन बिहाव तब ले मया करे ल जानेन,
ददा दाई कहिदेइस तेने ल अपन मानेन ।
अब तो बर न बिहाव देखावत हे दिल के ताव,
बाबू मन रंग रूप ल त नोनी मन धन दोगानी ल
देवत हे कइसन के भाव ।
जेन भाग के करे बिवाह तेखर मन के दशा ल विचार,
न ददा के न दाई के घिरर घिरर के जिये बर लाचार ।
बड़ आंगाभारू हे मया पिरित के संसार
ऐमा मै नई सकंव,
धरे कलम गुनत हंव अब का लिखंव ।

धरे कलम गुनत हंव का लिखंव
कतको झन लिखत हे नेतागिरी म व्यंग,
महू लिखतेव सोच के रहिगेव दंग ।
ऐ नेतामन कोन ऐ करिया अक्षर भईंस बरोबर,
जम्मो झन एके तरिया के चिखला ले हे सरोबर ।
चिनहावत नईये कोन काखर कोन काखर,
जम्मो झन दिखथें एक दूसर ले आगर ।
बड़ भोरहा हे ऐमा के रेंगई,
मै लगत हव बछरू लेवई ।
बड़ अंधियारी नेतागिरी के संसार
ऐमा मै नई सकंव,
धरे कलम गुनत हंव अब का लिखंव ।

धरे कलम गुनत हंव का लिखंव
देश भक्ति के गीत लिख के कतका झन होगे अमर,
महू गा लेतेंव अपन देश के दुश्मन संग हमर समर ।
देश के भीतर म आतंकवादी नक्सलवादीमन के हे भरमार,
कोनो मेरा कोनो ला मार देथे गम नई पावय सरकार ।
सीमा म चीन अऊ पाकीस्तान कइसे खड़े हे छाती तान,
सैनिक मन के घेंच ल उतारत हे नइये कोनो ल भान ।
जम्मोझन सुते हे देखत हे सपना,
हमर काम ल कोनो करही हमला का करना ।
बड़ा विचित्र हे हमार देश प्रेम दुलार
ऐमा मै नई सकंव,
धरे कलम गुनत हंव अब का लिखंव ।

धरे कलम गुनत हंव का लिखंव
लिखे के मोला काबर हे धुन सवार,
करत हव मै हर ऐमा तो अब विचार ।
तुलसी मीरा सूर कबीरा दादू नानक,
लिखिन साखी भक्ति पद मानस ।
कतको बड़े बड़े हवय अभो कलमकार,
जेखर कलम देवत सुघ्घर आकार ।
अइसन सूरजमन के आघू म जुगुनू नई बन सकंव,
धरे कलम गुनत हंव का  लिखंव ।।

सोमवार, 5 अगस्त 2013

हरेली हे आज

हरेली के गाड़ा गाड़ा बधाई -

लइका सियान जुरमिल के खुशी मनाव हरेली हे आज ।
अब आही राखी तिजा पोरा अऊ जम्मो तिहार हो गे अगाज ।

चलव संगी धो आईय नागर कुदरा अऊ जम्मो औजार ।
बोवईय झर गे निदईय झर गे झर गे बिआसी के काज ।

हमर खेती बर देवता सरीखे नागर गैती हसिया,
इखर पूजा पाठ करके चढ़ाबो चिला रोटी के ताज ।

लिम के डारा ले पहटिया करत हे घर के सिंगार ।
लोहार बाबू खिला ले बनावत हे मुहाटी के साज ।।

ढाकत हे मुड़ी ल मछरी जाली ले गांव के मल्लार ।
ये छत्तीसगढ़ म हर तिहार के हे छत्तीस अंदाज ।।

बारी बखरी दिखय हरियर, हरियर दिखय खेत खार ।
चारो कोती हरियर देख के हमरो मन हरियर हे आज ।।

तरूवा के पानी गोड़इचा म आगे आज ।
माटी के सोंधी सोंधी महक के इही हे राज ।

गांव के अली गली म ईखला चिखला ।
चलव सजाबो गेडी के सुघ्घर साज ।।

जम्मो लइका जवान मचलहीं अब तो ,
बजा बजा के गेड़ी के चर चर आवाज ।।

चलो संगी खेली गेड़ी दउड अऊ खेली नरियर फेक,
जुर मिल के खेली मन रख के हरियर हरियर आज ।

................‘‘रमेश‘‘...........

गुरुवार, 1 अगस्त 2013

गुड़ म माछी कस

दूध बेचईया गली गली रेंगय मदिरा बेचईया बइठे सजाये साज रे ।
बहुत झन ल ऐखर ले कोई मतलब नइये कोनो कोनो पूछय राज रे ।।

मोर गांव के मरार बारी के भाटा धरे बइठे रहिगे हाट म ।
परदेशिया कोचिया के कड़हा कोचरा भाटा बेचागे आज रे ।।

गाया गरूवा बर ठऊर नइये कहां बनाई गऊठान ।
गांव के जम्मो सरकारी परीया घेरे हे गिद्ध अऊ बाज रे ।

नेता  मन नेतेच ऐ फेर चमचा मन बन गेहे बाप रे ।
गांव के कोनो मनखे ल चिंता नइये कइसे होही काज रे ।

कोनो कोनो भ्रष्टाचारी होतीन त कोई  बात नही ।
गुड़ म माछी कस झुम गे हे जम्मो झन आज रे ।।

...........‘‘रमेश‘‘................