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रमेशकुमार सिंह चौहान के छत्तीसगढ़ी काव्यांजली:- सुरता rkdevendra.blogspot.com

भोजली गीत


रिमझिम रिमझिम
सावन के फुहारे ।
चंदन छिटा देवंव दाई
जम्मो अंग तुहारे ।।

तरिया भरे पानी
धनहा बाढ़े धाने ।
जल्दी जल्दी सिरजव दाई
राखव हमरे माने ।।

नान्हे नान्हे लइका
करत हन तोर सेवा ।
तोरे संग मा दाई
आय हे भोले देवा ।।

फूल चढ़े पान चढ़े
चढ़े नरियर भेला ।
गोहरावत हन दाई
मेटव हमर झमेला ।।
-रमेशकुमार सिंह चैहान
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