सोमवार, 27 अक्तूबर 2014

ओ दरूहा मनखे

डुगुर-डुगुर डोले, बकर-बकर बोले, गांव के अली-गली मा, ओ दरूहा मनखे ।
कोनो ल झेपय नही, कोनो न घेपय नही, एखर-ओखर मेर, दत जाथे तन के ।।
अपने ओरसावत, अपने च सकेलत, झुमर-झुमर झूम, आनी-बानी गोठ ला ।
ओ कोनो ला ना सुनय, ना ओ कोनो ला देखय, देखावत हे अपने, हाथ करे चोट ला ।।

शुक्रवार, 24 अक्तूबर 2014

काबर करे अराम

आधा करके काम ला, काबर करे अराम ।
आज काल के फेर मा, कतका बाचे काम ।।
कतका बाचे काम, देख के चिंता होही ।
करहि जेन हा ढेर, बाद मा  बहुते रोही ।।
मन के जीते जीत, हार मन के हे व्याधा।
चिंता मा तन तोर, होय सूखा के आधा।।

गुरुवार, 23 अक्तूबर 2014

शुभ दीपावली

घर घर दीया बार, आज हे गा सुरहोत्ती ।
तुलसी चैरा पार, तोर घर कुरिया कोठी ।
घुरवा परिया खार, खेत बारी हे जेती ।
रिगबिग रिगबिग देख, हवय गा चारो कोती ।।

मंगलवार, 21 अक्तूबर 2014

कब आबे होश मा

एती तेती चारो कोती, इहरू बिछरू बन, देश के बैरी दुश्मन, घुसरे हे देष मा ।
चोट्टा बैरी लुका चोरी, हमरे बन हमी ला, गोली-गोला मारत हे, आनी बानी बेष मा ।।
देष के माटी रो-रो के, तोला गोहरावत हे, कइसन सुते हस, कब आबे होश मा ।
मुड़ म पागा बांध के, हाथ धर तेंदु लाठी, जमा तो  कनपट्टी ला, तै अपन जोश मा ।।

शुक्रवार, 17 अक्तूबर 2014

दो कवित्त्त

     दो कवित्त्त
                                  1-
फेशनन के चक्कर मा, दूसर के टक्कर मा, लाज ला भुलावत हे, गांव के टूरा टूरी ।
हाथ धरे मोबाईल, फोकट करे स्माईल, आंख मटक्का करत, चलावत हे छूरी ।।
करे मया देखा देखी, संगी संगी ऐती तेती, भागत उड़रहीया,  बाढ़े बाढ़े लईका ।
ददा ला गुड़ेरत हे, दाई ला भसेड़ेत हे, टोरत हे आजकल, लाज के फईका ।
                    2-.
ऐती तेती चारो कोती, इहरू बिछरू बन, देश के बैरी दुश्मन, घुसरे हे देश मा ।
चोट्टा बैरी लुका चोरी, हमरे बन हमी ला, गोली-गोला मारत हे, आनी बानी बेश मा ।।
देष के माटी रो-रो के, तोला गोहरावत हे, कइसन सुते हस, कब आबे होश मा ।
मुड़ म पागा बांध के, हाथ धर तेंदु लाठी, जमा तो  कनपट्टी ला, तै अपन जोश मा ।।

सोमवार, 6 अक्तूबर 2014

हमर किसान गा (मनहरण घनाक्षरी)

मुड़ मा पागा लपेटे, हाथ कुदरा समेटे,
खेत मेड़ मचलत हे, हमर किसान गा ।
फोरत हे मुही ला, साधत खेत धनहा,
मन उमंग हिलोर, खेत देख धान गा ।
लहर-लहर कर, डहर-डहर भर,
झुमर-झुमर कर, बढ़ावत शान गा ।
आनी-बानी के सपना, आंखी-आंखी संजोवत,
मन मा नाचत गात, हमर किसान गा ।