रविवार, 19 अप्रैल 2015

भोले बाबा

भोले बाबा हा अपन, तन म भभूत लगाय ।
सांप बिच्छु के ओ बने, अपन गहना सजाय ।।
अपन गहना सजाय, बाघ के छाला बांधे ।
जटा गंगा बिठाय, चंदा ला मुड़ मा सांधे ।।
बइठे बइला पीठ, डमरू तब ओखर बोले ।
तिरसूल धरे हाथ, दिखे हे सुघ्घर भोले ।।