शनिवार, 16 मई 2015

लिख-लिख कवि मरय

कविता लिख-लिख कवि मरय, पढ़य सुनय ना कोय ।
करय मसखरी जेन हा, ऊही हर अब कवि होय ।।
ऊही हर अब कवि होय, भाय जेला तो जनता ।
सुना चुटकिला गोठ, देख कइसे कवि बनता ।।
छंद मत लिख ‘रमेश‘, करा झन ऐखर फधिता ।
दिखय न कोनो मेर, जेन ला भाये कविता ।।