मंगलवार, 19 मई 2015

कान्हा बंशी जब फुके

कान्हा बंशी जब फुके, झरे झमा झम राग ।
चेतन मा कोने कहय, जड़ मा जागे अनुराग ।।
जड़ मा जागे अनुराग, होय राधा कस माटी ।
धुर्रा बने उडाय, छुये कान्हा के साटी ।।
ब्रज के ठुठवा पेड़, राग सुन होगे नान्हा । नान्हा-नानचुक
घाट-बाट चिल्लाय, अरे ओ कान्हा-कान्हा ।।