सोमवार, 25 मई 2015

सुरता झीरम कांड के

सुरता झीरम कांड के, ताजा होगे आज ।
जेमा हारे तो रहिन, लोकतंत्र के राज ।।
लोकतंत्र के राज, शहीद होइन गा नेता ।
समय कठिन गे बीत, धरे मुठ्ठी मा रेता ।।
ताजा हे वो घाव, बचे हे अब तक क्रुरता ।
कइसे होही नाश, जाय कइसे ओ सुरता ।।