मंगलवार, 19 मई 2015

लाल होगे हे जंगल

जंगल झाड़ी तोर हे, रूख राई हर तोर ।
मनखे मनखे तोर हे,काबर मचाय शोर ।।
काबर मचाय शोर, धरे बंदूक खांध मा ।
सिधवा ला बहकाय, घूसरे हवस मांद मा ।।
तहीं बरोबर सोच, होहि कइसे गा मंगल ।
कब तक पीबे खून, लाल होगे हे जंगल ।