मंगलवार, 19 मई 2015

तभो ददा हा, समझाथे

जेखरे भरोसा, पांच परोसा, तीनो बेरा, ओ खाथे ।
सुत उठ बिहनिया, खरे मझनिया, रात बियारी, धमकाथे ।
घर बइठे बइठे, काबर अइठे, अपन रौब ला, देखाथे ।
ददा ला ना भावय, ना डररावय, तभो ददा हा, समझाथे ।।

बेटा बातें सुन, थोकिन तै गुन, अपने जीवन, तै गढ़ ना ।
दुनिया इक मेला, पड़ न झमेला, रद्दा आघू , तै बढ़ ना ।।
हे गा पूछारी, सबो दुवारी, काम बुता ला, जे जाने ।
सुन बेटा हमार, हवय दरकार, अपने हिम्मत, जे माने ।।

हे तोरे अंदर, एक समुंदर, जेला तोला, हे मथना ।
जब खुदे कमाबे, अमृत ल पाबे, जेला तोला, हे चखना ।।
अपने बांटा धर, लालच झन कर, देखा-देखी, दुनिया के ।
बात मान अतके, झन रह सपटे, बन जाबे तै, गुनिया के ।।