सोमवार, 15 जून 2015

मोर मन हा गे डोल

धीरे-धीरे कान मा, मधुरस दिस ओ घोल ।
बोलिस ना बताइस कुछु, मोर मन हा गे डोल ।।
मोर मन हा गे डोल, देह के रूआब पाके ।
छेडि़स सरगम गीत, स्वास ले तीर म आके ।।
मुच-मुच ओ हर हाॅस, मोर हिरदय ला चीरे ।
आॅखी आॅखी डार, बोल दिस धीरे-धीरे ।।