गुरुवार, 25 जून 2015

रंधहनी मा झाक तो

रंधहनी मा झाक तो, कइसे बनथे भात ।
माई लोगिन का करे, कइसे ओ सिरजात ।।
कइसे ओ सिरजात, चूलहा मा आगी जी ।
कइसे रांधे भात, रांधते कइसे भाजी जी ।।
दया मया ला डार, बनाये हवय सही मा ।
जेवन हर ममहाय, तभे तो रंधहनी मा ।।