बुधवार, 3 जून 2015

गोठ करे हे पोठ रे

गोठ करे हे पोठ रे, संत कबीरा दास ।
आंखी रहिके अंधरा, देखे कहां उजास ।।
देखे कहां उजास, अंधियारे हा भाथे ।
आंखी कान मूंद, जेन अपने ला गाथे ।।
देखय ओ संसार, जेन जग छोड़ खड़े हे ।
परे जगत के फेर, आत्म के गोठ करे हे ।।
-रमेश चौहान