सोमवार, 29 जून 2015

साफ बोले मा हे बुराई का

आदरणीय सौरभ पाण्ड़े के भोजपुरी गजल
‘‘साफ़ बोले में बा हिनाई का ?
काहें बूझीं पहाड़-राई का ? ‘‘
के
छत्तीसगढ़ी मा अनुवाद -
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साफ बोले मा हे बुराई का ?
डबरा डिलवा हवय बताई का ??

रात दिन मा मितानी हे कइसन ?
धंधा पानी मा भाई-भाई का ??

सब इहां तो हवय सुवारथ मा ?
होय मा हमरे जग हसाई का ??

चंदा ला घेरे हे गा चंदैनी,
कोनो इंहा सभा बलाई का ??

आज साहित्य के मुनाफा का ?
ददरिया करमा गीत गाई का ??

जब मुठा के पकड़ बताना हे,
फेर ये हाथ अउ कलाई का ??

खुदकुसी के हुनर मा माहिर हम,
फेर का कामना, बधाई का ?

कोखरो मुॅंह मा खून जब लागय,
जानथन ऐखरे दवाई का ??