शुक्रवार, 31 जुलाई 2015

गीत सुंदर कांड के -1

भजत हे बजरंग- राम राम राम
समस्या विकट आय रे - समुद्दर हे विशाल कोन ओ पार जाय रे
समुद्दर हे विशाल कोन ओ पार जाय रे-
समुद्दर हे विशाल कोन ओ पार जाय रे
भजत हे बजरंग- राम राम राम
समस्या विकट आय रे - समुद्दर हे विशाल कोन ओ पार जाय रे
समुद्दर हे विशाल कोन ओ पार जाय रे-
समुद्दर हे विशाल कोन ओ पार जाय रे
भजत हे बजरंग- राम राम राम


अंगद करे विचार जामवंत के संग संग-जामवंत के संग संग
जामवंत के संग संग-सीता के खोज कर कोन हर भरय उमंग
कोन हर भरय उमंग-कोन हर भरय उमंग

बिधुन होय बजरंग-राम राम राम
भजन मा भुलाय रे- समुद्दर हे विशाल कोन ओ पार जाय रे

ताकत ला बतावय बेंदरा मन अपन-अपन-बेंदरा मन अपन अपन
बेंदरा मन अपन अपन-पूरा करय ना कोनो ऊंखर सपन
कोनो ऊंखर सपन- कोनो ऊंखर सपन

खोजे तब बजरंग-राम राम राम
कहां लुकाय रे- समुद्दर हे विशाल कोन ओ पार जाय रे

खोजत हे सब बेंदरा ऐती तेती जाय जाय-ऐती तेती जाय जाय
ऐती तेती जाय जाय-कहां हस बजरंग कती तै बिलमाय
कती तै बिलमाय-कती तै बिलमाय

मिले जब बजरंग-राम राम राम
जामवंत जगाय रे- समुद्दर हे विशाल कोन ओ पार जाय रे