बुधवार, 15 जुलाई 2015

बिचारा हा अनाथ बन

लइकापन ओ छोड़ के, बनगे हवय सियान ।
करय काम ओ पेट बर, देवय कोने ध्यान ।।
देवय कोने ध्यान, बुता ओ काबर करथे ।
लइकामन ला छोड़, ददा हा काबर मरथे ।।
सहय समय के मार, बिचारा हा अनाथ बन ।
करत करत काम, छुटे ओखर लइकापन ।।