गुरुवार, 2 जुलाई 2015

ये दुनिया कइसन हवय

पाना डारा ले लगे, नाचय कतका झूम ।
हरियर हरियर रंग ले, मन ला लेवय चूम ।।
मन ला लेवय चूम, जेन देखय जी ओला ।
जब ले छोड़े पेड़, परे हे पाना कोला ।।
खूंदय कचरय देख, आदमी मन अब झारा ।
कचरा होगे नाम, रहिस जे पाना डारा ।।

ये दुनिया कइसन हवय, जानत नइये कोन ।
रंगे जग के रंग मा, साधे चुप्पा मोन ।।
साधे चुप्पा मोन, मजा दुनिया के लेवत ।
आके जीवन सांझ, दोस दुनिया ला देवत ।।
कइसन के रे आज, जमाना पल्टी खाये ।
सुनलव कहत ‘रमेश‘, करम फल तै तो पाये ।।