गुरुवार, 23 जुलाई 2015

राम बने हे काबर मनखे

मनखे मनखे सब सुनय, राम कथा मन लाय ।
कहय सुनय हर गांव मा, मनखे मन हरसाय ।।
मनखे मन हरसाय, राम के महिमा सुन सुन ।
जागे एक सवाल, मोर मन मा तो सिरतुन ।।
खोजव बने जवाब, जेन जाने हव तनके ।
भवसागर मा राम, बने हे काबर मनखे ।।

हेतु अनेका जनम के, कोनो कहय विचार ।
विप्र धेनु अरू संत हित, लिन्ह मनुज अवतार ।।
लिन्ह मनुज अवतार, विजय जय ला तारे बर ।
मेटे बर तो पाप, रावणे ला मारे बर ।।
नारद के ओ श्राप, घला हा बने लपेटा ।
काला कहि हम ठोस, जनम के हेतु अनेका ।।

सतजुग त्रेता के कथा, तैं हर सबो सुनाय ।
कलजुग मा का काम के, कारण जेन बताय ।।
कारण जेन बताय, देख ओला आंखी ले ।
चलत हवे विज्ञान, खोजथे सब साखी ले ।।
येही जुग के नाम, हवय गा पापी कलजुग ।
खाय तभे पतिआय,  कहां बाचे हे सतजुग ।।

मरयादा ला राम हा, जी  के तो देखाय ।
जइसे के विज्ञान हा, कारण देत जनाय ।।
कारण देत जनाय, बने ओ काबर मनखे ।
मनखे के मरजाद, बनाये हे छन छन के ।।
कसे कसौटी देख, राम के हर वादा ।
मनखे कइसे होय, होय कइसे  मरयादा ।।

कारण केवल एक हे, जेखर बर ओ आय ।
मनखे बन भगवान हा, मनखे ला सीखाय ।।
मनखे ला सीखाय, होय मनखे हा कइसे ।
करिहव अइसने काम, करत हन हम जइसे ।।
सत के सद्दा रेंग, आस ला करके धारण ।
फेल होय के तोर, नई हे कोनो कारण ।।