शनिवार, 4 जुलाई 2015

सावन झूला झूलबो

सावन झूला झूलबो,
बांधे अमुवा डार ।

पुरवाही सुघ्घर चलत, होके देख मतंग ।
चल ओ राधा गोमती, मीना ला कर संग ।
मितानीन हे संग मा, धरे सहेली चार ।। सावन......

झिमिर झिमिर पानी गिरे, नाचे मनुवा मोर ।
चीं-चीं चिरई हा करत, देवत मधुरस घोर ।
हरियर हरियर हे गजब, चारो कोती खार  ।। सावन....

छुये हवा जब देह ला, रोम रोम खिल जाय ।
झूला झूलत देख के, कोन नई हरसाय ।।
सरर सरर झूला चले, चुनरी उड़े हमार ।। सावन....

महर महर ममहाय हे, कतका फूले फूल ।
भवरा बइठे फूल मा, रस चूहे मा मसगूल ।।
देख सखी तै संग मा, आके संग हमार ।। सावन.....