मंगलवार, 28 जुलाई 2015

दोहा-ददरिया

नायक
हसिया धर कांदी लुये,
तैं हर धनहा पार ।
गोई तोला देख के,
आवत हवे अजार ।।

 नायिका
जा रे बिलवा भाग तैं,
काबर आये हस पार ।
आवत हे मोरे ददा,
पहिलि खुद ल सम्हार ।।

नायक
तोर मया ला पाय के,
सुध बुध मैं भूलाय ।
काला संसो अउ फिकर,
चाहे कोनो आय ।।

नायिका
धरे हवे लाठी ददा,
आवत हाथ लमाय ।
छोड़ चटहरी भाग तैं,
देही सबो भूलाय ।।

नायक
मया उलंबा होय हे,
कहां हवे डर यार ।
तोला मे हर पाय बर,
आय हवॅव ये पार ।।

 नायिका
जा जा जोही भाग तैं,
तोरे मया अपार ।
तोरे घर ला मैं धनी,
कर लेहूं ससुरार