मंगलवार, 14 जुलाई 2015

कतका तैं इतराय हस

राम राम कह राम, जगत ले तोला तरना ।
आज नही ता काल, सबो ला तो हे मरना ।।
मृत्युलोक हे नाम, कोन हे अमर जगत मा ।
जप ले सीताराम, मिले हे जेन फकत मा ।।
अपन उमर भर देख ले, का खोये का पाय हस ।
लइका पन ले आज तक, कतका तैं इतराय हस ।।