सोमवार, 31 अगस्त 2015

मनखे मनखे बाट

1. जतका महिमा हे कहे, गुरू मन के सब वेद ।
         एक्को लक्षण ना दिखय, आज होत हे खेद ।।

2. आत्म ज्ञान ला छोड़ के, अपने नाम रटाय ।
         दान-मान ला पाय के, कोठी बड़े बनाय ।।

3. आत्म-ज्ञान काला कथे, हमला कोन बताय ।
        कहां आत्म ज्ञानी हवय, हमला कोन लखाय ।।

4. ज्ञान हवे का ओखरे, जाने गा भगवान ।
         बड़का ओखर ले कहां, जग मा हे धनवान ।।

5. अपन धरम ला काट के, गढ़े हवे नव पंथ ।
        जेला चेला मन कहय, नवाचरण के कंथ ।।

6. जेन पेड़ के डार हे, जर ल ओखरे काट ।
        संत घला कहावत हे, मनखे मनखे बाट।।

शनिवार, 29 अगस्त 2015

भादो महिना तोर तो

भादो महिना तोर तो, रहीस अगोेरा घात ।
सावन महिना भाग गे, हम सब ला तरसात ।।

बरस तरस के आज तैं, देख सुखावत धान ।
धान-पान बिन आदमी, कइसे मारय शान ।।
बिन पानी तो धान हा, लगे हवे अइलात ।। भादो महिना तोर तो.....

कतका निंदा निंदबो, ओही ओही झार ।
मिलय नही बनिहार हा, कामचोर भरमार ।
अब तो तोरे आसरा, दिल मा हमन बसात । भादो महिना तोर तो......

सरवर-दरवर तैं बरस, बता अपन पहिचान ।
बरस झमा-झम आज तैं, बाढ़य तोरे मान ।
अतका पानी तैं बरस, नाचय सबो जमात । भादो महिना तोर तो.....

गुरुवार, 27 अगस्त 2015

करे हिलोर हृदय मा

करे हिलोर हृदय मा, तोर मया हा धूम ।
मैं भवरा तैं फूलवा, नाचत हॅंव मैं झूम ।।

तोर मया हा साॅस हे, पुरवाही म समाय ।
देखत तोरे चेहरा, पीरा सबो नसाय ।।

मोरे तन मन तोर हे, जीनगी घला तोर ।
मोरे अंतस मा चले, तोर मया के शोर ।।

मछरी बन तउरत हॅंवव, दहरा मया अथाह ।
तोर मया हा पानी बने, करे मोर परवाह ।।

देखत रह चुप-चाप तैं, मंद-मंद मुस्काय ।
देखत हॅंव मैं एकटक, भीतर तोर समाय ।।

बुधवार, 26 अगस्त 2015

चिक्कन चांदन अंगना

चिक्कन चांदन अंगना, चिक्कन-चिक्कन खोर ।
तन मन ला राखे बने, खुशी भरे हर पोर ।।

पानी पीये साफ तैं, कपड़ा पहिरे साफ ।
घर आघू कचरा परे, कोन करय जी माफ ।।
साफ सफाई राख तैं, खोर गली ला तोर ।। चिक्कन चांदन अंगना.....

साफ सफाई काम बर, अगल-बगल झन देख ।
हाथ बटा लव काम मा, देखव मत मिन-मेख ।।
अपन अपन घर-द्वार के, काड़ी-कचरा जोर । चिक्कन चांदन अंगना.....

अपन जुठा मुॅह ला खुदे, धोथव जी हर कोय ।
अपन मइल ला आन बर, काबर देत बरोय ।।
तोरे सेती गांव मा, कचरा होय न थोर । चिक्कन चांदन अंगना....

बाहिर बट्टा कोन हा, बइठे माड़ी मोड़ ।
डहर-डहर भर देख लव, रखत बने ना गोड़ ।।
का करही सरकार हा, अइसन आदत तोर । चिक्कन चांदन अंगना....

आदत अपन सुधार लव, सुधर जही गा गांव ।
साफ सफाई शांति के, बन जाही जी छांव ।।
चिरई कस फुदकी हमन, तिनका-तिनका जोर । चिक्कन चांदन अंगना....

सोमवार, 24 अगस्त 2015

दारू मंद के लत लगे

दारू मंद के लत लगे, मनखेे मर मर जाय ।
जइसे सुख्खा डार हा, लुकी पाय बर जाय ।।

तोरे पइसा देह हे, कर जइसे मन आय ।
पी-पा के तैं हा भला, काबर जगत सताय ।

मान बढ़ाई तैं भला, राखे काखर सोच ।
गारी-गल्ला देइ के, लेथस इज्जत नोच ।।

कुकुर असन तैं तो भुके, बिलई कस मिमिआय ।
कभू शेर सियार बने, समझ नई कुछु आय ।।

बने भिखारी दारू बर, बेचे अपन इमान ।
पाछू तैं देखात हस, आन बान अउ शान ।।

बुधवार, 19 अगस्त 2015

नाग पंचमी

दूध ले गिलास भरे, हाथ मा पट्टी ला धरे,
नाग फोटु उकेर के, स्कूल जात लइका ।
फूल-पान ला चढ़ाये, नाग देवता मनाये ,
नरियर ला फोर के, रखे हवें सइता ।।
बारी-कोला खेत-खार, माटी दिया दूध डार,
भिमोरा ला खोज के, पूजे हवे किसाने ।
प्राणी प्राणी हर जीव, जेमा बिराजे हे षिव,
नाग हमर देवता, धरती के मिताने ।।

जांघ निगोट लपेट, धोती कुरता ला फेक,
बड़े पहलवान हा, देख तइयार हे ।
गांव मा खोजत हवे, चारो कोती घूम-घूम
लडे बर तो गांव मा, कोन होशियार हे ।
जांघ ला वो ठोक-ठोक, कहत हे घेरी-बेरी,
अतका जड़ गांव मा, लगथे सियार हे ।
आजा रे तैं जवान, आजा गा तैं किसान,
मलयुद्ध तो खेलबो, पंचमी तिहार हे ।।

मंगलवार, 18 अगस्त 2015

एक आसरा सार हे,

एक आसरा सार हे,
बाकी सब बेकार ।

जिनगी पानी फोटका, बनते बिगड़े जाय ।
का राखे हे देह के, कब जग ले बिलगाय ।।
जेखर हम उपजाय हन, ओही तो हे सार ।। एक आसरा सार हे.....

खेल कूद लइकापन म, जानेन एक बात ।
भरे जवानी मा घला, मिले हवे सौगात ।।
सुख के संगी सब हवय, दुख मा हे लाचार ।। एक आसरा सार हे.....

मोर मोर तैं तो कहे, कोन चीज हे तोर ।
जग मा आके पाय हस, आंखी देख निटोर ।।
मुठठी बांधे आय हन, जाबो हाथ पसार ।। एक आसरा सार हे.....

जग के मालिक एक हे, लाखों नाम धराय ।
करता धरता तोर तो, नजर कहां हे आय ।।
अंतस अंतस हे बसे,  खोजे हस संसार ।। एक आसरा सार हे.....

भज ले ओही राम ला, बोल खुदा के नाम ।
समरथ सिराय तोर जब, आही वोही काम ।।
मनखे तन ला पाय के, संतन गोठ सवार ।। एक आसरा सार हे.....

हिम्मत बने बटोर

मंजिल पाना जब हवे, हिम्मत  बने बटोर ।

आघू आघू रेंग तैं, पाछू ला झन देख ।
गय दिन हा बहुरा नही, बदल भाग के रेख ।
छोड़ कुलुप के फेर ला, आघू मा हे अंजोर ।। मंजिल पाना जब हवे....

मन के हारे हार हे, करले लाख उपाय ।
पग पग मा हे जीत हा,  जब मन बने सहाय ।।
मन तो तोरे पास मा, मन के तारे ला जोर ।। मंजिल पाना जब हवे....

जीवन के तकलीफ ला, अपन परीक्षा मान ।
सोना आगी मा तपे, कुंदन बने महान ।।
हरिशचंद ला याद कर, कष्ट सहे हे घोर ।। मंजिल पाना जब हवे....

सोमवार, 17 अगस्त 2015

काव्य मा रस

सुने पढ़े मा काव्य ला, जउन मजा तो आय ।
आत्मा ओही काव्य के, रस तो इही कहाय ।

चार अंग रस के हवय, पहिली स्थाई भाव ।
रस अनुभाव विभाव हे, अउ संचारी भाव ।।

भाव करेजा मा बसे, अमिट सदा जे होय ।
ओही स्थाई भाव हे, जाने जी हर कोय ।।

ग्यारा स्थाई भाव हे, हास, षोक, उत्साह ।
क्रोध,घृणा,आश्चर्य भय,शम,रति,वतसल,भाह ।।  भाह-भक्ति भाव

कारण स्थाई भाव के, जेने होय विभाव ।
उद्दीपन आलंबन ह, दू ठन तो हे नाव ।।

जेन सहारा पाय के, जागे स्थाई भाव ।
जेन विषय आश्रय बने, आलंबन हे नाव ।।

जेन जगाये भाव ला, ओही विषय कहाय ।
जेमा जागे भाव हा, आश्रय ओ बन जाय ।।

जागे स्थाई भाव ला, जेेन ह रखय जगाय ।
उद्दीपन विभाव बने, अपने नाम धराय ।।

आश्रय के चेश्टा बने, व्यक्त करे हेे भाव ।
करेे भाव के अनुगमन, ओेही हेे अनुभाव ।।

कभू कभू जे जाग के, फेर सूत तो जाय ।
ओही संचारी भाव गा, अपने नाम धराय ।।

चार भाव के योग ले, कविता मा रस आय ।
पढ़े सुने मा काव्य के, तब मन हा भर जाय ।।

रविवार, 16 अगस्त 2015

बेजा कब्जा घात

गली गली हर गांव मा,
बेजा कब्जा घात ।

गली गली छेकाय अब, रद्दा रेंगव देख ।
कतका मनखे हे तपे, गांव गली ला छेक ।।
मनखेपन के मान मा, कतका करे अघात ।। गली गली हर गांव मा....

जे सरकारी जमीन लगय, मान बाप के माल ।
लाठी जेखर हाथ मा, ऊधम करे धमाल ।।
मुटुर मुटुर सब देखथे, कइसन हवे जमात ।। गली गली हर गांव मा....

तरिया नरवा छेक के, दे हें ओला पाट ।
कहां हवे पानी भला, कहां हवे गा घाट ।।
बरजे मा माने नही, करत हवे उत्पात ।। गली गली हर गांव मा....

कोन खार परिया बचे, कहां बचे गउठान ।
छूटय ना ये बंधना, पारे हवे गठान ।
गउ ला माता जे कहे, कइसे गे हे मात ।। गली गली हर गांव मा....

बिता बिता ठउर बर, ले लेथे गा जान ।
अपन भला तो हे अपन, पर के अपने मान ।।
लगय देख ये हाल ला, अम्मावस के रात ।। गली गली हर गांव मा....

लोकतंत्र के राज मा, मनखे के ये रोग ।
करे आजाद देश  ला, चढ़ाये हवें भोग ।।
वोट बैंक के फेर मा, नेता करे न बात ।। गली गली हर गांव मा....

भूत मया के हे धरे (दोहा-ददरिया)

नायक
कहां जात हस आज तैं, करे बने सिंगार ।
कुछु कांही तो बोल ले, करके तैं उपकार ।।

नायिका
का मतलब तोला हवय, कर तैं अपने काम ।
जाना हे मोला जिहां, जाहूं ऊही धाम ।।

नायक
बोली ले महुहा झरे, सुन सुन नशा छाय ।
चंदा बानी चेहरा, रति हर देख लजाय ।।
थोरिक बिलम्ब ले इहां, जाबे तब संसार ।। कहां जात हस आज तैं......

 नायिका
बड नटखट बदमाश हस, रद्दा छेके मोर ।
काम बुता तैं छोड़ के, ठाड़े दांत निपोर ।।
चल हट रद्दा छोड़ दे, होत हवे रे घाम ।। का मतलब तोला हवय......

नायक
रद्दा छोड़े मैं खड़े, काबर दोश लगाय ।
अंतस अपने देख ले, कोन भला बिलमाय ।
तन धर के ठाड़े मया, तोरे रद्दा पार ।। कहां जात हस आज तैं......

नायिका
बइही  अस मोला लगय, सुन के तोरे गोठ ।
तैं दूरीहा मा खड़े, कोन धरे हे पोठ ।।
भूत मया के हे धरे, अब का होही राम ।। का मतलब तोला हवय......

शनिवार, 15 अगस्त 2015

चिंतन

धरम धरम के शोर हे, जाने धरम ल कोन ।
कट्टर मन चिल्लाय हे, धरमी बइठे मोन ।।

पंथ पंथ के खेल ले, खेले काबर खेल ।
एक पेड़ के हे तना, तभो दिखय ना मेल ।।

अपन सुवारथ मा करे, धरम करम के मोल ।
हत्या आस्था के करे, अपने बजाय ढोेल ।।

भक्त बने के साध मा, मनखे हे बउराय ।
गिद्ध बाज मन ला घला, अपनेे गुरू बनाय ।।

गुरू भक्ति के जोश मा, माने ना ओ बात ।
छोड़ सनातन बात ला, रचे अपन औकात ।।

एक गांठ हरदी धरय, अइसन गुरू हजार ।।
चार वेद हा सार हे, होये पंथ हजार ।

बेटा मारे बाप ला, अपन ल बड़े बताय ।
अइसन गुरू घंटाल हा, अपने पंथ बनाय ।।

बाट सनातन धर्म ला, डंका अपन बजाय ।
सागर मा होकेे खड़ा, सागर खुदे कहाय ।।

भेद संत के कोन हा, आज जान हे पाय ।
संत कभू बाजार मा, ठाठ-बाठ देखाय ।।

ज्ञानी घ्यानी संत हा, करे सनातन गान।
अपन बड़ाई छोड़ के, करथे सबके मान ।।

परम तत्व केे खोेज मा, रहिथे जेन सहाय ।
जंगल झाड़ी हे कहां, हमला कोन बताय ।।

अपन अपन आस्था हवय, धरव जिहां मन भाय ।
धरे हवस तैं जान के, बिरथा दोश लगाय ।।

तोरे आस्था हे बड़े, मोर कहां कमजोर ।
जाबो एके घाट मा, जिहां बसे चितचोर ।।

तोरे आस्थ हा गढ़े, कोनो ला भगवान ।
पथरा पथरा ला मिले, तभे इहां सम्मान ।।

रविवार, 9 अगस्त 2015

संत कइसे तैं माने

लेथस साग निमार के, दू पइसा के दाम ।
बीज घला बोये हवस, सूखा के तैं घाम ।
सूखा के तैं घाम, बने घिनहा ला जाने ।
बिना बिचारे फेर, संत कइसे तैं माने ।।
आस्था अपन निकाल, बिना परखे तै देथस ।
धरम करम के नाम, बिना सोचे कर लेथस ।।

शनिवार, 8 अगस्त 2015

बाबा बनहू

बेटा का बनबे बाढ़ के, पूछेंव एक बार ।
सोच समझ के तैं बता, कइसे होबे पार ।।
कइसे होबे पार, जगत के मझधारे ले ।
तन मन सुघ्घर होय, अपन चिंता मारे ले ।।
बेटा बने सियान, कहय गा छोड़ चपेटा ।
बाबा बन के नाम, कमाही तोरे बेटा ।।

मंगलवार, 4 अगस्त 2015

दोेहा-ददरिया

नायिका
सावन मा लागे झड़ी, हरर हरर तो जेठ ।
तोर अगोरा मैं धनी, खड़े दुवारी पेठ ।।
नायक
बात जेठ के छोड़ दे, आगे सावन देख ।
होही हरियर अब छोर हा, अचरा मया समेख ।।
नायिका
सपना जइसे हे लगे, तोर मया के गोठ ।
दरस परस बर तोर गा, जागे पियास पोठ ।।
नायक
साॅस साॅस मा तैं बसे, मोरे साॅस चलाय ।
बैरी गोरी साॅस ले, कइसे तैं बिसराय ।।
नायिका
डारा डारा नाचथे, भवरा देख लुभाय ।
काचा काचा ओ कली, कइसे जाय भुलाय ।।
नायक
कांटा छेदे पंख ला, तभो कली बर जाय ।
भवरा देथे प्राण ला, जग ला मया जनाय ।।
नायिका
मैं अइलावत धान कस, रहेंव गा मुरझाय ।
सावन बरखा बूॅंद कस, मोला तैं जीयाय ।।
नायक
तोरे ले मोरे हवय, जीवन के ये डोर ।
चीत चोर सजनी भला, समझे कइसे चोर ।।
नायिका
बालम तोरे आय ले, आये जीवन मा भोर ।
तोर मया के गोठ ला, बांधे रहिंव छोर ।।
नायक
ऐही आसा विष्वास हा, बने मया के गांठ ।
बोली बतरस मा अपन, हॅसी खुषी ला साट ।।
-रमेेश चौहान

गीत सुंदर कांड के-5

सीता माता ला देखे हव का जी, मोर राम के ओ दुलारी ला
सीता माता ला देखे हव का जी, मोर राम के ओ दुलारी ला
वल्कल पहिरे वियोग गहिरे, दुख के ओ दुखयारी ला जी
वल्कल पहिरे वियोग गहिरे दुख के ओ दुखयारी ला जी
सीता माता ला देखे हव का जी, मोर राम के ओ दुलारी ला
सीता माता ला देखे हव का जी, मोर राम के ओ दुलारी ला

रावण के लंका बस्ती मा, कोन संत के हे बासा
रावण के लंका बस्ती मा, कोन संत के हे बासा
जेखर अंगना तुलसी बिरवा, जेखर अंगना तुलसी बिरवा,
राम नाम हे दरवाजा, दुखयारी ला देखे हव का जी
मोर राम के ओ दुलारी ला

राम राम कहि विभिशण जागे, सम्मुख हनुमत पाये
राम राम कहि विभिशण जागे, सम्मुख हनुमत पाये
देख देख एक दूसर ला, देख देख एक दूसर ला,
अपन गला लगाये, दुखयारी ला देखे हव का जी
मोर राम के ओ दुलारी ला

विभिशण ला संत जाने, पूछत हवे हनुमान
विभिशण ला संत जाने, पूछत हवे हनुमान
रावण जेन नारी हर लाय, रावण जेन नारी हर लाय
रखे हे कोन स्थान, दुखयारी ला देखे हव का जी
मोर राम के ओ दुलारी ला

गीत सुंदर कांड के-4

खोजन लागे हनुमान, खोजन लागे हनुमान
लंका के घर-घर मा सीता ला खोजन लागे
खोजन लागे हनुमान, लंका के घर-घर मा सीता ला खोजन लागे
खोजन लागे हनुमान, लंका के घर-घर मा सीता ला खोजन लागे

चोरहा रावण सीता ला कती राखे गा
चोरहा रावण सीता ला कती राखे गा
ये कती राखे हे गा, ये कती राखे हे गा
कती राखे गा, कती राखे गा
मोरे रामे के सीता ला, मोरे रामे के सीता ला
मोरे रामे के सीता ला कती राखे ना
सीता ला खोजन लागे
खोजन लागे हनुमान, लंका के घर-घर मा सीता ला खोजन लागे

रावण के राजेमहल मा सीता हवय का
रावण के राजेमहल मा सीता हवय का
ये सीता हा हवय का, ये सीता हा हवय का
सीता हवय का, सीता हवय का
सीता होही दुखयारी, सीता होही दुखयारी
होही कोनो आन, ये सीता नई लागे

सीता ला खोजन लागे
खोजन लागे हनुमान, लंका के घर-घर मा सीता ला खोजन लागे

रविवार, 2 अगस्त 2015

गीत सुंदर कांड के-3

अंतस मा रामे ला राखे, हाथे मा गदा ला साजे
अंतस मा रामे ला राखे, हाथे मा गदा ला साजे
पहाड़े ऊपर जाके गा..........., रामदूत हनुमान
रामदूत हनुमान भरे हे उड़ान,
सीता खोजे बर हो राम


पानी ले बाहिरे आके, हाथ जोड़े हे मैनाके
कहय थिरालव सुराताके, मोरे पीठे मा आके,
मैनाके ला हाथ लगा के गा................, रामदूत हनुमान
रामदूत हनुमान भरे हे उड़ान,
सीता खोजे बर हो राम


देवता मन जब ओला देखे, ऊंखर मन मा षंका होगे
मुॅह ला सत जोजन करके, सुरसा ओखर रद्दा रोके,
सुरसा मुहे मा जाके गा.............., रामदूत हनुमान
रामदूत हनुमान भरे हे उड़ान,
सीता खोजे बर हो राम

आघू मा जब लंका आगे, मसक समान ओ रूप ला साजे
तभो लंकीनी हा ओला पागे, रोके रद्दा आघू जाके
लंकीनी ला मुटका जमा के गा..............., रामदूत हनुमान
रामदूत हनुमान भरे हे उड़ान,
सीता खोजे बर हो राम

मोर मितान

हर सुख दुख मा साथ रहय, संगी मोर मितान ।
जानय मन के भेद ला, मोला गढ़े महान ।
मोला गढ़े महान, हाथ धर रेंगय आघू ।
जब भटकय मन मोर, रखय समझाय अगाघू ।।
सुनलव कहय ‘रमेश‘, मिताने हा समझे हर दुख ।
संगी बिना बेकार, लगय जीवन के हर सुख ।।

-रमेश चौहान