बुधवार, 26 अगस्त 2015

चिक्कन चांदन अंगना

चिक्कन चांदन अंगना, चिक्कन-चिक्कन खोर ।
तन मन ला राखे बने, खुशी भरे हर पोर ।।

पानी पीये साफ तैं, कपड़ा पहिरे साफ ।
घर आघू कचरा परे, कोन करय जी माफ ।।
साफ सफाई राख तैं, खोर गली ला तोर ।। चिक्कन चांदन अंगना.....

साफ सफाई काम बर, अगल-बगल झन देख ।
हाथ बटा लव काम मा, देखव मत मिन-मेख ।।
अपन अपन घर-द्वार के, काड़ी-कचरा जोर । चिक्कन चांदन अंगना.....

अपन जुठा मुॅह ला खुदे, धोथव जी हर कोय ।
अपन मइल ला आन बर, काबर देत बरोय ।।
तोरे सेती गांव मा, कचरा होय न थोर । चिक्कन चांदन अंगना....

बाहिर बट्टा कोन हा, बइठे माड़ी मोड़ ।
डहर-डहर भर देख लव, रखत बने ना गोड़ ।।
का करही सरकार हा, अइसन आदत तोर । चिक्कन चांदन अंगना....

आदत अपन सुधार लव, सुधर जही गा गांव ।
साफ सफाई शांति के, बन जाही जी छांव ।।
चिरई कस फुदकी हमन, तिनका-तिनका जोर । चिक्कन चांदन अंगना....