सोमवार, 31 अगस्त 2015

मनखे मनखे बाट

1. जतका महिमा हे कहे, गुरू मन के सब वेद ।
         एक्को लक्षण ना दिखय, आज होत हे खेद ।।

2. आत्म ज्ञान ला छोड़ के, अपने नाम रटाय ।
         दान-मान ला पाय के, कोठी बड़े बनाय ।।

3. आत्म-ज्ञान काला कथे, हमला कोन बताय ।
        कहां आत्म ज्ञानी हवय, हमला कोन लखाय ।।

4. ज्ञान हवे का ओखरे, जाने गा भगवान ।
         बड़का ओखर ले कहां, जग मा हे धनवान ।।

5. अपन धरम ला काट के, गढ़े हवे नव पंथ ।
        जेला चेला मन कहय, नवाचरण के कंथ ।।

6. जेन पेड़ के डार हे, जर ल ओखरे काट ।
        संत घला कहावत हे, मनखे मनखे बाट।।