सोमवार, 14 सितंबर 2015

अब तो बांटा तोर हे

शान रहिस जे काल के, रहिस हमर पहिचान ।
नंदावत वो चीज मा, कइसे डारी जान ।।

कतको बरजे डोकरा, माने नही जवान ।
जुन्ना डारा छोड़ के, टूटथे नवा पान ।।

गोठ नवा जुन्ना चलय, जइसे के दिन रात ।
अपन अपन हा पोठ हे, जेखर सुन ले बात ।।

दुनिया के बदलाव ला, आॅंखी खोल निटोर ।
ओही चंदा अउ सुरूज, ओही धरती तोर ।।

अपन रीति रिवाज धरे, पुरखा आय हमार ।
अब तो बांटा तोर हे, ऐला तैं सम्हार ।।