बुधवार, 16 सितंबर 2015

चरण पखारॅंव तोर प्रभु

चरण पखारॅंव तोर प्रभु, श्रद्धा भेट चढाय ।
तोरे मूरत ला अपन, हिरदय रखॅव मढाय ।।

हाथी जइसे मुॅह हवय, सूपा जइसे कान ।
हउला जइसे पेट हे, लइका के भगवान ।।
तोरे अइसन रूप हा, तोर भगत ला भाय । चरण पखारॅंव तोर प्रभु....

सहज सरल तो तैं हवस, सब ला देत अषीश ।
लइका मन तोला अपन, संगी कर डारीष ।।
लाये तोरे मूरती, घर-घर मा पघराय । चरण पखारॅंव तोर प्रभु...

जम्मो बाधा मेटथस, पाय भगत गोहार ।
कारज के षुरूवात मा, करथन तोर पुकार ।।
विघ्न हरन तब तो जगत, तोरे नाम धराय । चरण पखारॅंव तोर प्रभु.....

...©-रमेश चौहान