शनिवार, 26 सितंबर 2015

पितर पाख

पितर पाख मा देवता, पुरखा बन आय ।
कोनो दाई अउ ददा, कोनो बबा कहाय ।।

श्रद्धा अउ विश्वास मा, होवय नही सवाल ।
अपन अपन आस्था हवय, काबर करे बवाल ।।

हरियर हरियर पेड़ मा, पानी नई पिलोय ।
मरे झाड़ मा तैं अभे, हउला भरे रिकोय ।।

बारे न दिया रात मा, दिन म करे अंजोर ।
बइहा पूरा देख के, तउरे ल सिखे घोर ।।

अपने पहिली प्यार ला, भूलय ना संसार ।
तोरे दाई के मया, आवय पहिली प्यार ।।

रंग रंग के हे मया, एक रंग झन देख ।
सात रंग अउ सात सुर, दुनिया रखे समेख ।।

नारी के नारी मनन, समझे कहां सुभाव ।
सास बहु मन गोठ मा, कर डारे हे घाव ।।

दाई के ओ बेटवा, बाई के सिंदूर ।
जेन रंग ला वो धरे, रंगे हाथ जरूर ।।

नारी ले परिवार हे, नारी ले घर-द्वार ।
चाहे ओ हर जोर लय, चाहे रखय उजार ।।

सास ससुर दाई ददा, बनके करे दुलार ।
बहू घला बेटी असन, करय उन्हला प्यार ।।

बने रहय विश्वास हा, आस्था रहय सजोर ।
श्रद्धा के ये श्राद्ध हा, दया करय पुरजोर ।।

-रमेश चौहान