रविवार, 27 सितंबर 2015

दाई नवगढ़हिन


दाई नवगढ़हिन हवय, माना तरिया पार ।
नाव महामाया हवय, महिमा हवय अपार ।।

लाल बरन दाई हवय, जिभिया लाल लमाय ।
लाली चुनरी ओढ़ के, अपन दया बगराय ।।
कहन डोकरी दाई हमन, करके मया दुलार । दाई नवगढ़हिन हवय ..

दाई मयारू घात हे, पुरखा हमर बताय ।
सबो भगत के दुख दरद, सुनते जेन मिटाय ।।
राज पहर ले हे बसे, किल्ला पुछा कछार । दाई नवगढ़हिन हवय...

मंदिर तरिया घाट हा, बनते बनते जाय ।
फेर बिराजे दाई इहां, आसन एक जमाय ।।
ददा बबा ले आज तक, करत हमर उद्धार । दाई नवगढ़हिन हवय....