मंगलवार, 29 सितंबर 2015

माता रानी, दाई ओ

हे जग कल्याणी, आदि भवानी, माता रानी, दाई ओ ।
दुष्टन ला मारे, संतन तारे, भगत उबारे, दाई ओ।
जुग जुग ले छाहित, हवस समाहित, श्रद्धा भगती -मा दाई ।।
मां तोरे ममता, सब बर समता, जीव जंतु मा, हे छाई ।।

आये नवराते, भगतन माते, दिन राते तो, सेवत हे ।
नौ दिन नौ रूपे, भगतन झूपे, साट हाथ मा, लेवत हे ।
जय जय मां काली, शेरावाली, खप्पर धारी, दाई ओ ।
तहीं दंतेश्वरी, बम्मलेश्वरी, चंद्रहासनी, अउ तहीं महा-माईओ ।

पहिली दच्छसुता, के शैलसुता, ब्रह्मचारणी, दूसर मा ।
तीसर चंद्रघण्टा, हे कूष्माण्डा, चउथा नामे, तो उर मा ।।
पंचम स्कन्धमाता, भाग्य विधाता, कात्यानी तो, छठ दाई ।
कालरात्रि साते, गौरी आठे, नवम सिद्धदात्री, नौ दाई ।।

तोरे दरवाजा, भगत समाजा, अपने माथा, फोरत हे ।
सब औती-जौती, धरे मनौती, अपने हाथे, जोरत हे ।।
मन मा विश्वासा, होही आसा, अब तो पूरा, दाई ओ ।
ये ममता तोरे, जिनगी मोरे, कूंद-कूंद सुघ-राई ओ ।।