बुधवार, 30 सितंबर 2015

कोन रचे जग सृष्टिन सुंदर

हे मइया महिमा तुहरे जग
चार जुगे त्रिय काल समाये ।
वो तइहा अउ आज घला सब
भक्त मिले तुहरे जस गाये ।
पार न पावय देवन सृष्टि म
नेति कहे सब माथ नवाये ।
ये मनखे कइसे तुइरे जस
फेर भला कुछु बात बताये ।।

कोन रचे जग सृष्टिन सुंदर,
लालन पालन कोन करे हे ।
कोन इहां उपजावय जीवन,
काल धुरी भुज कोन धरे हे ।।
जेखर ले उपजे विधि शंकर,
जेन रमापति ला उपजाये ।
आदि अनंत न जेखर जानन,
शक्ति उही हर काय कहाये ।।

शैल सुता ह रचे जग सुंदर,
लालन पालन गौरि करे हे ।
आदि उमा उपजावय जीवन,
काल धुरी भुज कालि धरे हे ।।
आदिच शक्ति ह तो विधि शंकर
राम रमापति ला उपजाये ।
आदि अनंत पता नइ जेखर,
शक्ति उही हर मातु कहाये ।।

-रमेश चौहान
मिश्रापारा, नवागढ
जिला-बेमेतरा