शुक्रवार, 4 सितंबर 2015

आजा माखन चोर

रद्दा जोहत हन हमन, आजा माखन चोर ।
तोर बिना बिलवा कहूं,  लगे न मन हा मोर ।।

तोरे मूरत देख के, आंखी म आसुु आय।
मोर-मुकुट मुड़ मा हवय, मुॅह बसरी हा भाय ।।
सुन सुन लीला तोर तो, नाचे मनुवा मोर । रद्दा जोहत हन हमन...

अपन भगत बर तैं करे, बाल-चरित ब्रजधाम ।
लइका सियान तोर तो, धरे मोहना नाम ।।
तोरे सुरता रात दिन, करे करेजा षोर । रद्दा जोहत हन हमन...

भेट करे के आस मा, मोर चलत हे सास ।
आज नही ता काल तैं, रखबे मोरे आस ।।
तोर हाथ मा तो हवय, मोरे जीवन डोर ।। रद्दा जोहत हन हमन...