गुरुवार, 1 अक्तूबर 2015

धर गांधी के बात ला


धर गांधी के बात ला, अपने अचरा छोर ।
सत्य अहिंसा के डहर, रेंगव कोरे कोर ।।

दिखय चकाचक गांव हा, अइसे कर तैं काम ।
दूर करव सब गंदगी, होवय जउन तमाम ।।
साफ सफाई होय ना, तन-मन के गा तोर । धर गांधी के बात ला....

मार काट ला छोड़ के, जोत शांति के बार ।
पर धन नारी देख के, कर झन अत्याचार ।।
अपन आचरण कर सुघर, झन तैं दांत निपोर । धर गांधी के बात ला....

गलती दूसर के दिखय, भीतर देखे कोन ।
मन के दरपन हाथ मा, काबर बइठे मोन ।।
सच हा सच होथे सदा, रखे जेन झकझोर । धर गांधी के बात ला...

महावरी के पाठ हे, ईसु बढ़ाये मान ।
बाबा घासी दास हा, करे हवे फरमान ।।
राम रहिम के देश मा, सच ईश्वर हे तोर । धर गांधी के बात ला.....