रविवार, 11 अक्तूबर 2015

गढ़बो अपने देश

जुरमिल संगी चलव सब, गढ़बो अपने देश ।
मनखे हा मनखे रहय, कइसनो होवय वेश ।।

देश भक्ति के राग मा, देवत अपने ताल ।
भारत माता एक हे, हम सब ओखर लाल ।।
जाति धरम के रूंधना, टोर-टार के लेश । जुरमिल संगी चलव सब....

हर मंदिर के षंख हा, करय एक जयकार ।
मस्जिद के अजान घला, करय खूब गोहार ।
जय जय मइया भारती, जय जय भारत देश । जुरमिल संगी चलव सब....

भात मिलय हर पेट ला, सबो हाथ ला काम ।
निरधन अउ बनिहार ला, मिलय बरोबर दाम ।।
मिलजुल रद्दा खोजबो, झन जावव परदेश । जुरमिल संगी चलव सब...

षासन चारा छोड़ के, नेता फांदा टोर ।
हाथ हाथ सब जोर के, करत नवा अंजोर ।।
अपने झगरा मेटबो,  मेटत सबो कलेश । जुरमिल संगी चलव सब