सोमवार, 19 अक्तूबर 2015

दे दाई कुछु खाय


बेटा-
बासी दे के भात दे, दे दाई कुछु खाय ।
सांय सांय जी हा करय, कुछु ना तो भाय ।।

दाई-
 दाना दाना खोज के, लेहूं भात बनाय ।
बेटा थोकिन सांस ले, बासी घला सिराय ।।

बेटा-
ठोमा ठोमा मांग के, ठोमा ना पाऐंव ।
गे रहेंव आंसू धरे, आंसू धर आऐंव ।।

दाई-
पानी हे आंसू हमर, पथरा हे भगवान ।
निरधन के तैं छोकरा, का तोरे हे मान ।।

बेटा-
भूख प्यास जानय नही, काबर अइसन बात ।
भर जातीस पेट हमर, दुच्छा देखत जात ।।

दाई-
गरीबहा बन पाप ला, भोगे भर आयेंन ।
भूख प्यास के मार ला, खूबे हम खायेंन ।।

-रमेश चौहान