शुक्रवार, 2 अक्तूबर 2015

जय जय मइया जग कल्याणी

जय जय मइया आदि भवानी । जय जय मइया जग कल्याणी
तोरे भगतन सेवा गावय । आनी बानी रूप सजावय

सोलह सिंगार तोर माता । परम दिव्य हे जग विख्याता
मनखे भगती अपन देखावय । सुघर रूप ला अउ सुघरावय

पांव महुर दे पैजन बांधे । चुटकी बिछिया संगे सांधे
कनिहा मा करधन पहिरावय। करधन घुंघरू बाज बजावय

ककनी बहुटा हाथ सजाये । लाल चुरी संगे पहिराये
लाली लुगरा अउ लाल चुनर । सुतिया पहिरावय माॅं के गर

कानन कुण्डल नथली नाके । गाल इत्र चंदन ले ढाके
मांघे मोती बिन्दी माथे । फूलन गजरा चुन्दी गाथे ।

सब सिंगार मा विष्वास भरे । भगतन श्रद्धा ले भेट करे
मइया स्वीकार करव सेवा । भगती के दव हमला मेवा