मंगलवार, 20 अक्तूबर 2015

होगे मोरे जीनगी


होगे मोरे जीनगी, कइसन ऊंच पहाड़ ।
सकला गे सब मास हा, बाचे केवल हाड़ ।।

हाथ गोड़ होगे सगा, मोला तो बिसराय ।
मोरे आंखी मोर ले, आंखी अब चोराय ।।
मन बैरी मानय नहीं, खड़े हवे जस ताड़ । होगे मोरे जीनगी...

कुरिया खटिया टूटहा, रचे मोर संसार ।
भड़वा बरतन फूटहा, करिया करिया झार ।।
मोर रंग मा रंग के, होगे सबो कबाड़ । होगे मोरे जीनगी....

नवा नवा समान हवे, जुन्ना के का काम ।
डारे जेला कोनहा, बेटा बहू तमाम ।।
दोष कहां कुछु कोखरो, करथे सबो जुगाड । होगे मोरे जीनगी..

आंखी आंखी घूमथे, जुन्ना दिन हा मोर ।
रूप रंग के मोर तो, होवय कतका शोर ।।
मोला देखे काम मा, समा जवय जब जाड़ । होगे मोरे जीनगी..

-रमेश चौहान