शनिवार, 24 अक्तूबर 2015

शक्ति हमला दे अतका

हे गुरू घासीदास, शक्ति हमला दे अतका ।
छोर सकी सब गांठ़, परे हे मन मा जतका ।।
हे गुरू घासीदास, शक्ति हमला दे अतका ।
छोर सकी सब गांठ़, परे हे मन मा जतका ।।

बैरी हे मन मोर, बइठ माथा भरमाथे ।
डगर झूठ के छांट, हाथ धर के रेंगाथे ।।
अइसन करव उपाय, छूट जय ऐखर झटका ।
हे गुरू घासीदास, शक्ति हमला दे अतका ।।

सत के रद्दा तोर, परे जस पटपर भुइया ।
कइसे रेंगंव एक, दिखे ना एको गुइया ।।
परे असत के फेर, खात हन हम तो भटका ।
हे गुरू घासीदास, शक्ति हमला दे अतका ।।

मन मंदिर मा तोर, एक मूरत दे अइसन ।
जिहां बसे हे झार, असत मन हा तो कइसन ।।
मर जावय सब झूठ, पाय मूरत के रचका ।
हे गुरू घासीदास, शक्ति हमला दे अतका ।।