मंगलवार, 20 अक्तूबर 2015

चोर चोर ओ चोर हे

चोर चोर ओ चोर हे, परत हवे गोहार ।
वाटसाप अउ फेसबुक, ओखर हवे शिकार ।।

एक डाड लिख ना सकय, कवि कहाय के साध ।
पढ़े लिखे वो चोर हा, करत हवे अपराध ।।
शारद के परसाद के, करे ओ तिरस्कार । चोर चोर ओ चोर हे...

सब अइसन ओ चोर ला, देवव दंड कठोर ।
खडे रहय बजार मा, ओ हर दांत निपोर ।।
संगत ओखर छोड़ दव, मुख ला दै ओ टार । चोर चोर ओ चोर हे..

अतको मा मानय नही, कोरट रद्दा भेज ।
आखर के दुश्मन हवय, कइसे करि परहेज ।।
नो हय हासे के बुता, लेवव काम सवार । चोर चोर ओ चोर हे....