शनिवार, 31 अक्तूबर 2015

जबर गोहार लगाबो

अपने ला बिसराय, नशा मा जइसे माते ।
अपन गांव ला छोड़, शहर ला वो तो भाते ।।
नषा ओखरे तोड़, चलव झकझोर जगाबो ।
बनय गांव हा नेक, जबर गोहार लगाबो ।।

जागव संगी मोर, पहाती बेरा आगे ।
जाके थोकिन देख, खेत मा आगी लागे ।
हरहा हरही झार, खेत ले मार भगाबो ।
बाचय हमर धान, जबर गोहार लगाबो ।।

दोसा इडली छोड़, फरा चैसेला खाबो ।
पाप सांग अब छोड़, ददरिया करमा गाबो ।।
छत्तीसगढ़ीया आन, जगत ला हमन बताबो ।
अपन देखावत शान, जबर गोहार लगाबो ।।