शुक्रवार, 23 अक्तूबर 2015

गांव बसे हमरे दिल मा

गांव बसे हमरे दिल मा हम तो लइका अन एखर संगी ।
गांवन मा सबके ममता मिलथे कुछु बात म होय न तंगी ।।
जोतत नागर खेत किसान धरे मुठिया कहिथे त तता जी ।
खार अऊ परिया बरदी म चरे गरूवा दिखथे बढि़या जी ।।