बुधवार, 18 नवंबर 2015

खोजव खोजव चोर ला......

खोजव खोजव चोर ला, कोने मेर लुकाय ।
करके आघू आन ला, कइसे के भरमाय ।।

दिखथे हमला मोहरा, हवय शकुनि के चाल ।
पै बारा ला देख के, होगे बारा हाल ।।
काट मोहरा फेकथन, लेथे नवा बनाय । खोजव खोजव चोर ला......

कट्टरता के देह के, आतंकवाद नाम ।
जात धरम जानय नही, मारे ले हे काम ।।
सोचे के तो बात हे, कट्टर कोन बनाय । खोजव खोजव चोर ला...

जर मा पानी पाय के, बिरवा बनथे झाड़ ।
काटव जर ला खोज के, बाते लेवव ताड़ ।।
मारव अइसन सोच ला, कट्टर जेन बनाय । खोजव खोजव चोर ला....