सोमवार, 30 नवंबर 2015

माटी हमरे गांव के...

माटी हमरे गांव के, महर महर ममहाय ।
चंदन ले आगर लगय, माथा देव चढ़ाय ।।

दाई के कोरा असन, माटी हवय महान ।
अपन गांव के ये मया, मिलय न कहूं जहान
उपजे बाढे हन जिहां, धुररा देह लगाय । माटी हमरे गांव के......

खेेले कूदे हन जिहां, आनी बानी खेल ।
संगी संगी हम रहन, करके सबले मेल ।।
नरवा तरिया के मया, हमला रहय लुभाय ।। माटी हमरे गांव के......

चांव चांव चिरई करय, अपने पाखी खोल ।
हरियर हरियर खार मा, मनुवा नाचय डोल ।।
अमराई बोइर झरी, अपने तीर बलाय।। माटी हमरे गांव के......

कहां मोर लइका हवय, कइसन ओखर हाल ।
कइसे ओ बिसराय हे, मोर हाल बेहाल ।।
गांव तोर सुरता करय, आंखी आंसु ढराय । माटी हमरे गांव के...